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कालानुक्रमिक गणना की प्राचीन पद्धति वीर निर्वाण सम्वत- संजय जैन बड़जात्या

कालानुक्रमिक गणना की प्राचीन पद्धति वीर निर्वाण सम्वत- संजय जैन बड़जात्या कामां

रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां डीग 9783029649

कामां- वर्तमान में कालक्रम की गणना हेतु विभिन्न सम्वत प्रचलन में हैं उन सब का संक्षिप्त विवेचन करे तो जैन धर्म के अनुसार वीर निर्वाण सम्वत कालानुक्रम गणना का सबसे प्राचीन सम्वत है। वीर निर्वाण संवत (युग) एक कैलेंडर युग है जिसकी शुरुआत ५२७ ई॰पू॰ से हुई थी। यह जैन धर्म के अंतिम व २४ वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण का स्मरण कराता है। यह कालानुक्रमिक गणना की सबसे पुरानी व प्राचीन प्रणाली में से एक है जो अभी भी भारत में उपयोग की जाती है। वीर निर्वाण सम्वत जैन धर्म की प्राचीनता,वैभवता का प्रस्तुतिकरण तो करता है साथ ही विद्वता व ज्ञान की उत्कृष्टता को भी प्रदर्शित करता है।
वीर निर्वाण सम्वत 22 अक्टूबर 2025 से 2552 वें वीर निर्वाण सम्वत का प्रारम्भ हो रहा है।
विक्रम संवत, ईसाई कैलेंडर से 57 साल आगे है अर्थात 2082, वहीं शक संवत, ईसाई कैलेंडर से 78 साल पीछे है अर्थात 1947 चल रहा है वही ईसाई (ग्रेगोरियन) कैलेंडर सम्वत 2025 ही चल रहा है अन्य संवत तो और भी पीछे निर्मित है। मुस्लिम हिजरी सम्वत तो 1436 वर्ष पूर्व ही निर्मित है।
यह सब विवेचन इस बात को प्रमुखता के साथ सिद्ध करते हैं कि जैन पद्धति व गणना अन्य सभी से प्राचीन है। कालानुक्रमिक गणना में जैन वीर निर्वाण सम्वत अति प्राचीन है। इसी दिवस से, पूर्व में व्यापारियों द्वारा नववर्ष मानकर अपने बहीखाते में परिवर्तन किया जाता था अर्थात नूतन बहीखाते प्रारम्भ किये जाते थे। कार्तिक मास की शुक्ल प्रतिपदा से वीर निर्वाण सम्वत का शुभारंभ माना जाता है।अतः जैन धर्मानुसार नूतन वर्ष की आप सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएं/बधाई।
संजय जैन बड़जात्या कामां

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